राहत इंदौरी का एक शेर है सरहदों पर तनाव है क्या, कुछ पता तो करो चुनाव है क्या ? लेकिन वक्त बदलने के साथ इस शेर ने भी अपनी मायने बदल दिए हैं, 1989 के बाद या यूँ कहें राम मंदिर आंदोलन क बाद देश की राजनीति ने जो दिशा और दशा बलदी उसके बाद उसमें चुनाव के समय सीमा पर तनाव तो कम होता है लेकिन देश में तनाव बढ़ जाता है, 1989 में बीजेपी के उग्र हिन्दुत्व के एजेंडे ने देश में हर चुनाव के समय तनाव बढ़ाने के काम ही किया है, इस एजेंडे में देश के फायदा है या नुकसान यह तो देश की जनता तय समय-समय पर तय करती रहती है लेकिन साफ है चुनावों के समय तनाव बढ़ने से कोई इनकार नहीं कर सकता ।
बीजेपी के तय एजेंडे पर क्यो चल रहे हैं सभी दल
बीजेपी की का ये एजेंडा इतना लोकप्रिय हुआ को विरोधी दलों को भी बहुसंख्यक हिनदू वोटरो की बात लगातार करनी पड़ती है चाहें राहुल गांधी हो अखिलेश हो या ममता बनर्जी सबने मीडिया और जनता के सामने अपने आप को हिन्दू और सनतनी होने का सर्टिफिकेट पेश किया है यानि साफ है 1989 से पहले चो चुनाव साम्प्रदायिक बनाम असाम्प्रदायिक हुआ करता था अब हो साफ्ट हिन्दूत्व बनाम हार्ड हिन्दूत्व हो गया है इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में 80 फीसदी से ज्यादा आबादी वाले किसी समुदाय को हाशियें पर नही ढंकेला जा सकता है।
इंदिरा-राजीव की कांग्रेस से कैसे अलग हो गई सोनिया राहुल की कांग्रेस
बात करें कांग्रेस की तो इस पार्टी ने 1989 तक बहुमत के साथ इस देश पर शासन किया है और उस दौर में हमेशा पार्टी हिन्दूत्व को ही अपना चेहरा बनाने की कोशिश की, अगर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की फोटो पर बारिकी से नजर डालेगें को तो कभी भी बिना बड़ी रूद्राक्ष की माला के नजर नहीं आएगी, शाहबानो प्रकरण के बार राममंदिर का ताला खोलने के दौरान अपनी मौन सहमति से राजीव गांधी ने भी देश के बहुसंख्यकों को ये भरोसा दिलान की कोशिश कि की कांग्रेस उनके साथ है यहां तक कि पीवी नरसिंहा राव ने भी अयोध्या में विवादित ढ़ाचा गिराये जाने पर अपनी मौन सहमति प्रदान कर ये संदेश दिया कि वो हिन्दूत्व के खिलाफ नहीं है लेकिन सोनिया गांधी के हाथ में कांग्रेस की कमान आने के बाद पार्टी नेताओं ने जिस तरह खुलमखुला हिन्दूव के खिलाफ बयान दिया है उससे पार्टी का चेहरा हिन्दूव विरोधी हो गया।
उत्तर प्रदेश में किस हद तक जाएगी राजनीति
उत्तर प्रदेश का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा वैसे-बैस बीजेपी नेता उग्र मुस्लिम विरोधी बयान देने में लगे है उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने मदरसों का आतंक का अड्डा बता कर इस आग को एक बार हवा दे दी है, अभी तो ये शुरूआत है देखना ये है कि चुनाव आते-आते ये आग कहां तक जाएगी और चुनाव में धर्म का मुद्दा कहां से कहा तक जाएगा।

















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