दिवाली के त्योहार से पहले राजधानी दिल्ली में मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली के मोरी गेट स्थित खोया मंडी में जांच के दौरान लगभग 7,000 किलोग्राम संदिग्ध और खराब गुणवत्ता वाला खोया जब्त कर नष्ट किया गया।
अधिकारियों के मुताबिक, बाजार से लिए गए 44 नमूनों की मौके पर जांच की गई, जिनमें से 35 प्रारंभिक परीक्षण में फेल पाए गए।
इस कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी बाजार का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि संदिग्ध खाद्य सामग्री उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचनी चाहिए।
त्योहारी मौसम में यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिवाली के दौरान मिठाइयों, दूध और खोये की मांग तेजी से बढ़ जाती है।
मोरी गेट खोया मंडी में क्या हुआ?
इंडियन एक्सप्रेस की 4 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली खाद्य सुरक्षा विभाग ने मोरी गेट की खोया मंडी में विशेष अभियान चलाया।
इस दौरान लगभग 7,000 किलो संदिग्ध और दुर्गंध वाला खोया जब्त कर नष्ट किया गया।
अधिकारियों ने मौके पर 44 निगरानी नमूने एकत्र किए।
इन नमूनों की जांच मोबाइल प्रयोगशाला यानी Food Safety on Wheels के माध्यम से की गई।
प्रारंभिक जांच में 35 नमूने फेल पाए गए।
इसके अलावा दो अतिरिक्त प्रवर्तन नमूने भी एकत्र किए गए, जिन्हें विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा गया।
यह अंतर समझना जरूरी है कि मौके पर हुई प्रारंभिक जांच और विस्तृत प्रयोगशाला रिपोर्ट अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए सभी नमूनों के बारे में अंतिम कानूनी निष्कर्ष विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कार्रवाई के दौरान बाजार का निरीक्षण किया।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संदिग्ध और असुरक्षित खाद्य उत्पादों को बाजार से हटाया जाए और उन्हें खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने से रोका जाए।
सरकार की ओर से मिलावट के मामलों में सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।
स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने भी खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
उन्होंने राजधानी के विभिन्न जिलों में निरीक्षण और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
खोये में किस तरह की मिलावट की आशंका?
खोया दूध को गर्म करके तैयार किया जाने वाला प्रमुख खाद्य उत्पाद है।
इसका इस्तेमाल कई भारतीय मिठाइयों में किया जाता है।
प्रारंभिक जांच के दौरान संदिग्ध सामग्री में दूध पाउडर, वनस्पति और बाइंडिंग पदार्थों की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले।
हालांकि, किसी विशेष दुकानदार या विक्रेता के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित नमूनों की विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया आवश्यक है।
पहले भी नष्ट किया जा चुका है हजारों किलो खोया
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मोरी गेट बाजार में इससे पहले भी अलग-अलग तारीखों पर कार्रवाई की गई थी।
- 4 सितंबर को 2,830 किलो खोया नष्ट किया गया।
- 8 सितंबर को 610 किलो खोया नष्ट किया गया।
- 23 अक्टूबर को 520 किलो खोया नष्ट किया गया।
- 3 नवंबर को लगभग 7,000 किलो संदिग्ध खोया नष्ट किया गया।
इन कार्रवाइयों के बाद विभाग द्वारा हाल के अभियानों में नष्ट किए गए खोये की कुल मात्रा 10,660 किलो बताई गई है।
दिल्ली में अन्य खाद्य पदार्थों की भी होगी जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग ने केवल खोये पर ध्यान केंद्रित नहीं किया है।
अधिकारियों के अनुसार, दूध, पनीर, छेना, मिठाई, नमकीन, घी, खाद्य तेल और सूखे मेवों की भी जांच की जा रही है।
पिछले दो महीनों में विभाग ने 429 खाद्य नमूने एकत्र किए।
इनमें 307 प्रवर्तन नमूने और 122 निगरानी नमूने शामिल थे।
इसके अतिरिक्त घी में मिलावट की जांच के लिए चलाए गए विशेष अभियानों में 65 नमूने लिए गए, जिनमें से 19 असुरक्षित पाए गए।
मिलावटी मिठाई से स्वास्थ्य को क्या खतरा?
मिलावटी या खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
खासकर दूषित दूध और दूध से बने उत्पादों के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण, उल्टी, दस्त और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए त्योहारों के दौरान मिठाइयां खरीदते समय सावधानी जरूरी है।
उपभोक्ता मिठाई खरीदते समय क्या सावधानी रखें?
- हमेशा विश्वसनीय और साफ-सुथरी दुकान से मिठाई खरीदें।
- पैक्ड उत्पाद पर FSSAI लाइसेंस और तारीख जांचें।
- बहुत तेज या असामान्य गंध वाले उत्पाद न खरीदें।
- खुले में रखी मिठाइयों से बचें।
- खरीदारी की रसीद जरूर लें।
- संदिग्ध खाद्य पदार्थ की शिकायत संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग से करें।
निष्कर्ष: दिवाली से पहले दिल्ली में 7,000 किलो खोया नष्ट किए जाने की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती को सामने लाती है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ मिलावट रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और उपभोक्ताओं की जागरूकता दोनों जरूरी हैं।












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