BRICS 2026 का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश Global South को लेकर भारत की सक्रिय भूमिका रही। नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में भारत ने विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि Global South आज कई वैश्विक संकटों का सामना कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में उसकी भूमिका अभी भी अपेक्षा से कम है। उन्होंने वैश्विक शासन को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाने की आवश्यकता बताई।
Global South क्या है?
Global South किसी एक महाद्वीप या संगठन का नाम नहीं है।
इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और अन्य विकासशील या उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया जाता है।
इन देशों की बड़ी आबादी है, लेकिन वैश्विक संस्थाओं में उनकी प्रतिनिधित्व शक्ति कई बार उनकी आर्थिक और जनसंख्या क्षमता के अनुरूप नहीं होती।
BRICS इसी असंतुलन को चुनौती देने वाले प्रमुख मंचों में से एक बन गया है।
भारत की भूमिका
भारत खुद को Global South की एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
भारत की स्थिति विशेष है क्योंकि वह एक तरफ विकसित पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध रखता है, वहीं दूसरी तरफ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों के साथ भी सक्रिय सहयोग करता है।
BRICS भारत को इस पुल की भूमिका निभाने का अवसर देता है।
क्यों जरूरी है Global South की आवाज?
विकासशील देशों की चुनौतियां अलग हैं।
उन्हें जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, विकास वित्त और तकनीक तक पहुंच जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
लेकिन वैश्विक नियम कई बार ऐसी परिस्थितियों में बनते हैं जहां इन देशों की आवाज पर्याप्त नहीं होती।
भारत का कहना है कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के साथ संस्थागत प्रतिनिधित्व भी बदलना चाहिए।
UN सुधार से संबंध
Global South की आवाज का मुद्दा सीधे UN सुधार से जुड़ा है।
भारत चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़े।
BRICS ने इस दिशा में सामूहिक समर्थन का वातावरण तैयार किया है।
आर्थिक शक्ति
BRICS की बढ़ती आर्थिक शक्ति Global South की बहस को मजबूत करती है।
समूह के सदस्य देशों में चीन, भारत, ब्राजील और रूस जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
विस्तार के बाद मध्य पूर्व और अफ्रीका के महत्वपूर्ण देश भी समूह में आए हैं।
इससे BRICS का आर्थिक और भौगोलिक प्रभाव बढ़ा है।
विकास वित्त
Global South के देशों के लिए विकास वित्त एक बड़ी जरूरत है।
सड़क, बिजली, रेल, स्वास्थ्य, डिजिटल कनेक्टिविटी और जल प्रबंधन जैसी परियोजनाओं के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है।
New Development Bank इस दिशा में BRICS की महत्वपूर्ण संस्था है।
यदि विकासशील देशों को स्थानीय मुद्रा में अधिक वित्त मिलता है तो विदेशी मुद्रा जोखिम को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
तकनीक का मुद्दा
आज तकनीक आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है।
AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल पेमेंट, साइबर सुरक्षा और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में विकासशील देशों को भी अपनी क्षमता बढ़ानी है।
BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग इस अंतर को कम करने में मदद कर सकता है।
BRICS Summit में AI और तकनीक से जुड़े सहयोग की चर्चा इसी व्यापक एजेंडे का हिस्सा है।
क्या Global South एकजुट है?
यहां एक बड़ी चुनौती है।
Global South के सभी देश एक जैसी विदेश नीति नहीं रखते।
भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है। ईरान और खाड़ी देशों के हित अलग हैं। अफ्रीकी देशों की प्राथमिकताएं अलग हैं।
इसलिए Global South को एक समान राजनीतिक ब्लॉक मानना सही नहीं होगा।
लेकिन विकास, व्यापार और वित्त जैसे मुद्दों पर साझा हित बन सकते हैं।
BRICS का भविष्य
BRICS यदि Global South की समस्याओं को व्यावहारिक एजेंडे में बदलता है तो उसकी भूमिका मजबूत हो सकती है।
सिर्फ राजनीतिक बयान देने के बजाय व्यापार सुविधा, विकास वित्त, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीक में ठोस सहयोग जरूरी होगा।
भारत की चुनौती
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाए रखना है।
भारत को Global South की आवाज उठाते हुए अमेरिका, यूरोप, जापान और अन्य विकसित देशों के साथ अपने संबंध भी बनाए रखने हैं।
भारत की विदेश नीति इसलिए बहुस्तरीय है।
निष्कर्ष
BRICS 2026 में Global South का मुद्दा भारत की कूटनीति के केंद्र में रहा।
भारत का संदेश स्पष्ट है—विकासशील देशों को केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाला नहीं बल्कि नियम बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार होना चाहिए।
यदि BRICS इस विचार को व्यापार, वित्त, तकनीक और वैश्विक संस्थाओं में सुधार के ठोस कार्यक्रमों में बदलता है तो आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका काफी बढ़ सकती है।















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