नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन की बड़ी रैली आयोजित की गई। इस रैली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवाल और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा।
इस रैली को विपक्षी दलों ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा से जुड़ा आंदोलन बताया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए रैली के राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं।
रामलीला मैदान में जुटे विपक्षी दलों के नेता
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इस रैली को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं। कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया था।
रविवार सुबह से ही अलग-अलग राज्यों से आए पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक रैली स्थल पर पहुंचने लगे। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने मार्च भी निकाला। इस दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में पार्टी के झंडे और लोकतंत्र बचाने से जुड़े संदेश लिखे पोस्टर दिखाई दिए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई।
आखिर क्या है SIR विवाद?
इस रैली का सबसे बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग की ओर से चलाया जा रहा Special Intensive Revision यानी SIR अभियान है।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, मृत मतदाताओं के नाम हटाना, दोहराए गए नामों की पहचान करना और पात्र मतदाताओं का विवरण सही करना है।
हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जाने से वास्तविक मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार का पक्ष है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाता है। इसका उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना है।
इस तरह SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।
राहुल गांधी ने लोकतंत्र और संविधान का मुद्दा उठाया
रैली से पहले राहुल गांधी ने लोगों, युवाओं और नागरिक संगठनों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने इस आंदोलन को लोकतंत्र और संविधान की रक्षा से जुड़ा बताया।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। पार्टी चाहती है कि चुनाव आयोग इस मामले में उठाए गए सवालों का स्पष्ट जवाब दे।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। विपक्ष की ओर से उनके इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है।
मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी की मौजूदगी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी रैली में विपक्ष की एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष अपने आंदोलन को जारी रखेगा।
प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी ने भी इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाया। उनके अलावा समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
INDIA गठबंधन की कोशिश इस रैली के जरिए यह दिखाने की है कि मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्ष के कई दल इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा मानते हैं।
बीजेपी ने कांग्रेस और विपक्ष पर साधा निशाना
कांग्रेस की रैली को लेकर बीजेपी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्धारित नियमों के तहत होता है।
बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
इससे साफ है कि SIR का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश की राजनीति में एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है।
दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के इंतजाम
रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। पुलिस ने केंद्रीय दिल्ली के कई हिस्सों में यातायात को नियंत्रित करने और जरूरत के अनुसार मार्ग बदलने की व्यवस्था की।
यातायात संबंधी जानकारी के अनुसार, रैली के मद्देनजर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कुछ प्रमुख मार्गों पर प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए गए।
दिल्ली पुलिस ने लोगों को प्रभावित रास्तों से बचने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।
क्या कांग्रेस की रैली से बदलेगा राजनीतिक माहौल?
दिल्ली की यह रैली कांग्रेस और INDIA गठबंधन के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विपक्ष की कोशिश है कि SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे को देशभर में उठाया जाए।
हालांकि, इस आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव कितना होगा, यह आने वाले समय में साफ होगा। इसके लिए जरूरी है कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य और प्रमाण जनता के सामने रखे।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार के जवाब भी इस बहस की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दिल्ली के रामलीला मैदान से उठी राजनीतिक आवाज ने एक बार फिर चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकार और लोकतंत्र को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।
नोट: यह खबर 1 नवंबर 2026 को उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। SIR को लेकर विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत किया गया है।












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