भारत के शहर तेजी से बदल रहे हैं। नई सड़कें बन रही हैं, ऊंची इमारतें खड़ी हो रही हैं और मेट्रो जैसी सुविधाएं बढ़ रही हैं।
फिर भी हर साल प्रदूषण, पानी की कमी और कचरे की समस्या क्यों बढ़ती दिखाई देती है?
विकास और पर्यावरण का संतुलन
शहरों को विकास की जरूरत है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण की कीमत कितनी चुकानी चाहिए, यह बड़ा सवाल है।
सड़क, उद्योग और निर्माण गतिविधियां जरूरी हैं, लेकिन इनके साथ प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था भी जरूरी है।
पानी का संकट
कई शहरों में गर्मियों के दौरान पानी की समस्या गंभीर हो जाती है। बढ़ती आबादी, भूजल का अधिक इस्तेमाल और बारिश के पानी को पर्याप्त मात्रा में बचाकर न रख पाना इसके पीछे के कारणों में शामिल हो सकते हैं।
कचरा भी बड़ी चुनौती
शहरों में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा पैदा होता है। उसका सही तरीके से अलगाव, संग्रहण और निपटान नहीं हो तो इसका असर जमीन, पानी और हवा पर पड़ता है।
यक्ष प्रश्न
अगर विकास का उद्देश्य बेहतर जीवन है, तो क्या ऐसा विकास सही है जिसमें रहने के लिए हवा और पानी ही मुश्किल हो जाए?















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