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PM मोदी और पुतिन की मुलाकात: यूक्रेन युद्ध पर मोदी ने क्या कहा? SCO Summit 2026 की बड़ी बातें

PM मोदी और पुतिन की मुलाकात: यूक्रेन युद्ध पर मोदी ने क्या कहा? SCO Summit 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में मुलाकात हुई। यह बैठक 26वें Shanghai Cooperation Organisation (SCO) Summit के दौरान हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों, ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

लेकिन इस मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश यूक्रेन युद्ध और शांति को लेकर सामने आया।

PM मोदी ने पुतिन से क्या कहा?

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने यूक्रेन में जारी संघर्ष को लेकर भारत की स्थिति दोहराई।

मोदी ने कहा कि दुनिया को लगातार चल रहे युद्ध से निकलकर युद्ध के अंत की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने शांति और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान पर जोर दिया।

भारत लंबे समय से यह कहता रहा है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और बातचीत तथा कूटनीति के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।

मोदी-पुतिन मुलाकात क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, mobility और people-to-people ties सहित कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। दोनों ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

पुतिन ने मोदी को यूक्रेन संघर्ष की स्थिति के बारे में भी जानकारी दी।

BRICS Summit में पुतिन को न्योता

बैठक के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को भारत में होने वाले 18वें BRICS Summit में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।

यह सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को भारत में प्रस्तावित है।

इससे संकेत मिलता है कि भारत और रूस के बीच उच्चस्तरीय संपर्क आगे भी जारी रहने वाला है।

ईरान के राष्ट्रपति से भी मिले PM मोदी

पुतिन से मुलाकात से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की।

दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। मोदी ने तनाव कम करने और विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति से करने की भारत की नीति दोहराई।

भारत ने समुद्री व्यापार और navigation की सुरक्षा पर भी जोर दिया तथा कहा कि आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और commercial shipping को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।

मोदी ने पेजेशकियन को भारत में होने वाले BRICS Summit में आने का निमंत्रण भी दिया।

आर्मेनिया के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात

PM मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से भी बातचीत की।

दोनों देशों ने रक्षा, आर्थिक संबंध, फार्मा, विज्ञान एवं तकनीक, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

यह मुलाकात दिखाती है कि भारत मध्य एशिया और आसपास के क्षेत्रों में अपने कूटनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।

भारत की GDP Growth ने भी चौंकाया

इसी दिन भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई।

अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारत की GDP 7.8% की दर से बढ़ी। यह 7.1% के अनुमान से बेहतर रही। इस वृद्धि में मजबूत घरेलू खपत, निवेश और manufacturing sector की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

प्रधानमंत्री मोदी ने 7.8% GDP growth को बड़ी उपलब्धि बताया। PMO की आधिकारिक वेबसाइट ने भी इसे “herculean feat” के रूप में दर्ज किया है।

PM मोदी का विदेश दौरा क्यों खास है?

एक ही यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात भारत की बदलती वैश्विक भूमिका को दिखाती है।

एक तरफ भारत रूस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहा है, दूसरी तरफ ईरान के साथ व्यापार और क्षेत्रीय शांति पर बातचीत जारी है।

आर्मेनिया के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी बातचीत हुई।

इसके साथ ही भारत की मजबूत GDP growth देश की आर्थिक क्षमता को भी सामने रखती है।

भारत का संदेश साफ है—संवाद और सहयोग

PM मोदी की इन बैठकों में एक बात लगातार दिखाई देती है—संवाद और कूटनीति।

चाहे यूक्रेन का युद्ध हो या पश्चिम एशिया का संकट, भारत का जोर बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान पर है।

भारत अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखते हुए रूस, ईरान, यूरोप और अन्य देशों के साथ संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।

निष्कर्ष

PM मोदी और पुतिन की बिश्केक मुलाकात केवल भारत-रूस संबंधों तक सीमित नहीं है। यूक्रेन युद्ध, वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती विश्व राजनीति के बीच इस बैठक का महत्व काफी बढ़ जाता है।

इसके साथ ईरान और आर्मेनिया के साथ हुई बातचीत तथा भारत की 7.8% GDP growth ने 31 अगस्त को भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया।

मोदी-पुतिन मुलाकात का सबसे बड़ा संदेश यही रहा—युद्ध से समाधान नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से शांति की राह तलाशनी होगी।

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