सुबह से शाम तक हमें आसमान ज्यादातर नीला दिखाई देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान का रंग नीला ही क्यों होता है?
इसका जवाब सूर्य की रोशनी और पृथ्वी के वातावरण में छिपा है।
सूर्य की रोशनी सिर्फ सफेद नहीं
हमें सूर्य की रोशनी सफेद दिखाई देती है, लेकिन इसमें कई रंग शामिल होते हैं। जब यह रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है तो हवा के छोटे-छोटे कण प्रकाश को अलग-अलग दिशाओं में फैलाते हैं।
नीली रोशनी ज्यादा फैलती है
नीली रोशनी की तरंगदैर्ध्य लाल रोशनी की तुलना में छोटी होती है। वायुमंडल में नीली रोशनी ज्यादा फैलती है और हमारी आंखों तक अलग-अलग दिशाओं से पहुंचती है।
इसी वजह से हमें दिन के समय आसमान नीला दिखाई देता है।
सूर्यास्त के समय रंग क्यों बदलता है?
शाम के समय सूर्य की रोशनी को वातावरण में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस दौरान नीली रोशनी ज्यादा बिखर जाती है और लाल तथा नारंगी रंग की रोशनी हमारी आंखों तक ज्यादा पहुंचती है।
इसीलिए सूर्यास्त के समय आसमान लाल, नारंगी या पीला दिखाई दे सकता है।
निष्कर्ष
आसमान का नीला रंग किसी रंग की चादर की वजह से नहीं, बल्कि सूर्य के प्रकाश और पृथ्वी के वातावरण में प्रकाश के बिखरने की प्रक्रिया के कारण दिखाई देता है।
















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