वाणिज्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट ने सरकार और देश के आम उपभोग्ताओं के सामने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि वो चीनी खाये या गाड़ी चलाए दरअसल सरकार लगातार पेट्रोल में इथेनाल मिलाने के सवाल से ये कहकर बचती नजर आ रही थी कि ये मिलावट पेट्रोल की कीमतो पर काबू करने के लिए की गई है लेकिन पेट्रोल की कीमत काबू करने की कोशिश में सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ा दिया है ये त्योहारों के मौसम में चीनी के दाम रोज बढ़ रहे हैं और ये आरोप किसी विवक्ष में बैठे नेता का नहीं बल्कि वाणिज्य मंत्रालयय की एक रिपोर्ट इस ओर ईशारा कर रही है कि चीनी आम उपभोग के वस्तुओं की तुलना में ज्यादा तेजी से मंहगीं हो रही
चीनी के निर्यात करने वाले देश में अब आयात की तैयारी
वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबकि 2022-23 देश से 1.33 करोड़ टन चीनी-शीरा और इससे बने उत्पादों का निर्यात हुआ। 2023-24 में 51.35 लाख टन निर्यात की गई। 2024-25 में निर्यात घटकर 38.43 लाख टन तक सीमित हो गया। वर्ष 2026-27 में चीनी के निर्यात का आंकड़ा जीरो रहेगा, क्योंकि इस बार आयात करने की नौबत आ गई है सरकार इस साल 10 लाख टन चीनी आयात करने की तैयारी में .
उत्पादन बढ़ा लेकिन थाली तक नहीं पहुंची चीनी
दूसरी ओरर 2026-27 में गन्ने के कुल उत्पादन का अनुमान 46.3 करोड़ टन है। साथ ही, 3.36 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा है लेकिन देश में चीनी का स्टॉक घट गया दरअसल 2025-26 में पेराई सत्र शुरू होने से पहले मिलों का ओपनिंग स्टॉक 47 लाख टन था जो 2026-27 घट कर 32 लाख टन बचा है यानि 12 फीसदी उत्पानदन बढ़ने के बाद भी स्टॉक में करीब एक तिहाई की कमी आ गई , इसकी बड़ी वजह रही कि 2025-26 में 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना-शीरा एथेनॉल बनाने में लगा ये वही समय है जब पेट्रोल में इथेनाल की मात्रा 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया
विरोध हुआ तेज
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा, ‘हम 3 साल से कह रहे हैं कि चीनी के गन्ने का इथेनॉल में उपयोग मुश्किलें खड़ी करेगा इससे पहले भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति को लेकर ‘खाद्य बनाम ईंधन’ संकट की ओर सरकार और देश का ध्यान आकर्षित किया थ एक अग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में उन्होंने आगाह किया है कि ईंधन के लिए इथेनॉल बनाने में मक्के, गन्ने और खाद्यान्नों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से देश में गंभीर खाद्यान्न संकट और पानी की किल्लत खड़ी हो सकती है
आम लोगो पर दोहरी मार
साफ है पेट्रोल में इतेनाल की मिलावट से आम लोगों पर दोहरी मार पड़ती दिख रही है सरकार की इस कोशिश से उन्हें सस्ता पेट्रल तो नहीं मिला उनकी थाली महंगी हो गई दूसरी और अब एक्सपर्ट भी मानने लगे है कि ई-20 पेट्रोल से उनके मानको के अनुसार नहीं बनी गाडियों के इंजन और एवरेज पर असर पड़ रहा है















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