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Bharat@79 कहां खड़े हैं हम 79 साल की यात्रा, संघर्ष से विकास तक

Bharat@79: कहां खड़े हैं हम? 79 साल की यात्रा, संघर्ष से विकास तक

नई दिल्ली: 15 अगस्त 2026 को भारत अपनी आजादी के 79 वर्ष पूरे करेगा और 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा।

Bharat@79 सिर्फ एक स्लोगन नहीं है। यह उन 79 वर्षों की यात्रा को देखने का अवसर है, जिसमें देश ने आजादी के संघर्ष की विरासत से लेकर लोकतंत्र, विज्ञान, तकनीक, अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान तक लंबा सफर तय किया है।

लेकिन सवाल आज भी वही है—आखिर हम कहां खड़े हैं?

शहीदों के सपनों का भारत कैसा होता?

आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के सामने भविष्य की तस्वीर कितनी स्पष्ट थी, इसका कोई एक दस्तावेजी जवाब नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि स्वतंत्रता सेनानियों ने ऐसा भारत चाहा होगा जहां नागरिकों को सम्मान, अवसर और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की स्वतंत्रता मिले।

आज 79 वर्ष बाद यह सवाल पूछना जरूरी है कि क्या हर भारतीय को वह अवसर मिल पा रहा है जिसकी उम्मीद आजादी के समय की गई थी?

विकास हुआ, लेकिन सवाल भी बाकी हैं

भारत ने इन वर्षों में कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे, उद्योग और विज्ञान में देश की क्षमता दुनिया के सामने दिखाई देती है।

सरकार भी 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य सामने रख रही है और आत्मनिर्भरता, नवाचार तथा युवा सशक्तिकरण पर जोर दिया जा रहा है।

लेकिन विकास का दूसरा पहलू भी है। रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को लेकर असंतोष की आवाजें लगातार सामने आ रही हैं।

युवा पूछ रहे हैं—हमारा भविष्य कहां है?

हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर युवाओं के आंदोलन ने इस बहस को और तेज किया है। रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर हजारों युवाओं का आंदोलन और दिल्ली में परीक्षा सुधार से जुड़े प्रदर्शन इस बात की ओर संकेत करते हैं कि युवा केवल भाषण नहीं, बल्कि भरोसेमंद व्यवस्था चाहते हैं।

पटना में आयोजित एक युवा संसद में भी छात्रों ने शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार और शिक्षा तथा उद्योग के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत उठाई।

यह किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल का सवाल नहीं है। सवाल पूरी व्यवस्था का है।

क्या देश की सबसे बड़ी ताकत का पूरा इस्तेमाल हो रहा है?

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी मानव संपदा है। दुनिया की बड़ी युवा आबादी भारत के पास है। यदि इस युवा शक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, रोजगार और अवसर मिलें तो यही आबादी देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकती है।

लेकिन यदि पढ़े-लिखे युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहें, परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लगें और रोजगार के अवसर सीमित हों, तो निराशा स्वाभाविक है।

इसलिए विकास का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाएं या आर्थिक आंकड़े नहीं हैं। विकास का अर्थ यह भी है कि एक सामान्य युवा अपने भविष्य को लेकर कितना आश्वस्त है।

संवाद से ही विकास संभव

लोकतंत्र में असहमति कोई कमजोरी नहीं है। असहमति को सुनना और उस पर संवाद करना लोकतंत्र की ताकत है।

सरकार किसी भी दल या गठबंधन की हो, युवाओं के सवालों से संवाद जरूरी है। रोजगार, शिक्षा, परीक्षा सुधार और अवसर जैसे मुद्दों पर सरकार और युवाओं के बीच लगातार बातचीत होनी चाहिए।

क्योंकि जब संवाद बंद होता है तो असंतोष सड़क पर दिखाई देने लगता है।

Bharat@79 का असली सवाल

आजादी के 79 वर्ष पूरे होने पर सवाल यह नहीं होना चाहिए कि हमने कुछ हासिल किया या नहीं। सवाल यह होना चाहिए कि हमने जितना हासिल किया, क्या वह हर वर्ग और हर पीढ़ी तक समान अवसर के रूप में पहुंचा?

क्या गांव के युवा को भी वही अवसर मिलता है जो बड़े शहर के युवा को मिलता है?

क्या गरीब परिवार का बच्चा बिना आर्थिक दबाव के बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकता है?

क्या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा को व्यवस्था पर पूरा भरोसा है?

और सबसे महत्वपूर्ण—क्या आज का युवा अपने देश के भविष्य को लेकर आश्वस्त है?

निष्कर्ष: भारत को संवाद और भरोसे की जरूरत

Bharat@79 आत्ममंथन का अवसर है। देश ने लंबा सफर तय किया है और उपलब्धियां भी कम नहीं हैं। लेकिन मंजिल अभी बाकी है।

भारत की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। इस ताकत को सही दिशा देने के लिए शिक्षा, रोजगार, पारदर्शिता और संवाद को विकास के केंद्र में रखना होगा।

आजादी की 79वीं वर्षगांठ पर शायद सबसे जरूरी सवाल यही है—

हमने 79 वर्षों में क्या पाया, यह महत्वपूर्ण है; लेकिन अगली पीढ़ी को हम कैसा भारत देना चाहते हैं, यह उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Bharat@79 — सवाल भी हमारा, जवाब भी हमारा।