रात के करीब 11 बजे शहर की आखिरी बस निकलती थी।
उस बस का ड्राइवर हर रात एक ही जगह बस रोकता था।
वहां कोई यात्री खड़ा नहीं होता था।
कंडक्टर ने एक दिन पूछा—
“आप यहां बस क्यों रोकते हैं?”
ड्राइवर ने कहा—
“बस आदत है।”
कई दिनों बाद कंडक्टर ने फिर पूछा।
इस बार ड्राइवर ने बताया कि कई साल पहले इसी जगह उसकी पत्नी बस का इंतजार करती थी। एक रात वह देर से पहुंची और बस निकल गई।
उसके बाद दोनों में फोन पर बात हुई।
वह उनका आखिरी संवाद था।
पत्नी सड़क हादसे में नहीं बच सकी।
ड्राइवर ने तब से तय कर लिया था कि वह उस जगह से गुजरते हुए बस जरूर रोकेगा।
कंडक्टर ने पूछा—
“लेकिन अब तो वहां कोई आपका इंतजार नहीं करता।”
ड्राइवर ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा—
“पता है… लेकिन मैं आज भी उसका इंतजार करता हूं।”
बस कुछ सेकंड रुकी और फिर आगे बढ़ गई।
कुछ सफर मंजिल तक पहुंचने के लिए नहीं होते।
कुछ सफर सिर्फ यादों को जिंदा रखने के लिए होते हैं।















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