राहुल पढ़ाई के लिए शहर गया था। कुछ साल बाद नौकरी लगी और जिंदगी इतनी व्यस्त हुई कि गांव जाना कम हो गया।
मां हर महीने उसे चिट्ठी लिखती थी।
राहुल जवाब देने की सोचता, लेकिन हर बार काम के बीच बात टल जाती।
एक दिन मां का निधन हो गया।
घर की सफाई करते समय राहुल को लकड़ी के पुराने संदूक में उसकी सारी चिट्ठियां मिलीं।
लेकिन एक चिट्ठी ऐसी थी जिसे उसने कभी पढ़ा ही नहीं था।
उसमें लिखा था—
“बेटा, मुझे पता है तू बहुत व्यस्त है। मुझे जवाब नहीं चाहिए। बस कभी-कभी फोन पर अपनी आवाज सुना दिया कर।”
राहुल देर तक चिट्ठी हाथ में लिए बैठा रहा।
उस दिन उसे समझ आया कि मां ने उससे कभी पैसे, महंगे कपड़े या बड़ी चीज नहीं मांगी थी।
उसे सिर्फ बेटे का थोड़ा-सा समय चाहिए था।
कभी-कभी हम जिंदगी में बड़ी चीजें पाने के पीछे भागते हैं और सबसे जरूरी चीज को पीछे छोड़ देते हैं।















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