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गांव का वह कुआं, जिसमें हर साल एक सिक्का मिलता था

गांव का वह कुआं, जिसमें हर साल एक सिक्का मिलता था

गांव के बीचोंबीच एक पुराना कुआं था। लोग कहते थे कि उसमें हर साल सावन के महीने में एक नया सिक्का दिखाई देता है।

कोई नहीं जानता था कि सिक्का कौन डालता है।

गांव के बच्चों ने कई बार पता लगाने की कोशिश की, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ।

एक साल गांव के 12 साल के मोहन ने रात में कुएं के पास छिपकर बैठने का फैसला किया।

आधी रात के बाद एक बुजुर्ग महिला वहां आई।

उसने कुएं में सिक्का डाला और कुछ देर चुपचाप खड़ी रही।

मोहन ने पूछा—

“दादी, आप हर साल ऐसा क्यों करती हैं?”

महिला मुस्कुराई।

उसने बताया कि बहुत साल पहले उसके पति ने सूखे के दौरान गांव के इसी कुएं को साफ कराया था। उन्होंने गांव वालों से कहा था—

“जिस दिन गांव मुझे भूल जाए, उस दिन कुएं में एक सिक्का डाल देना।”

उनके जाने के बाद महिला हर साल यह करती रही।

मोहन ने अगले दिन पूरे गांव को यह कहानी बताई।

उस साल पहली बार गांव के हर घर से एक-एक सिक्का कुएं में डाला गया।

उसके बाद वह कुआं सिर्फ पानी का स्रोत नहीं रहा।

वह गांव की यादों का घर बन गया।

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