कहानियां सिर्फ मनोरंजन नहीं होतीं। वे हमारे बचपन की यादों, रिश्तों और अनुभवों को अपने भीतर संजोकर रखती हैं।
एक समय था जब शाम होते ही बच्चे दादा-दादी या नाना-नानी के आसपास बैठ जाते थे। फिर शुरू होती थी राजा-रानी, परियों, भूतों और गांव के किस्सों की दुनिया। उन कहानियों में मोबाइल स्क्रीन नहीं थी, लेकिन कल्पना की उड़ान बहुत बड़ी थी।
आज कहानी सुनने का तरीका बदल गया है। YouTube, OTT और सोशल मीडिया ने कहानी को नया मंच दिया है। लेकिन कहानी की मूल ताकत अभी भी वही है—वह इंसान को कुछ देर के लिए उसकी रोजमर्रा की जिंदगी से बाहर निकाल देती है।
किस्सागोई का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि एक साधारण घटना भी अच्छी कहानी बन सकती है। किसी पुराने स्टेशन पर हुई मुलाकात, गांव की बरसात, पिता की डांट या मां की आवाज—ये छोटी चीजें समय बीतने के बाद बड़ी यादें बन जाती हैं।
शायद इसलिए पुरानी कहानियां कभी पूरी तरह पुरानी नहीं होतीं।
निष्कर्ष: तकनीक कहानी सुनाने का तरीका बदल सकती है, लेकिन इंसान की कहानी सुनने की जरूरत कभी खत्म नहीं होगी।















Leave a Reply